Saturday, 30 April 2016

मैं, मेरी बीवी और चचेरे भाई का सपना हुआ सच -2

मैंने कहा- मधु, घर में एक ही बाथरूम है, जो इसी रूम के आगे है और बाथरूम तो वो भी उपयोग करेगा न… इसलिए कपड़े पहन लो, हम कल सुबह मस्ती मार लेंगे। वैसे भी अगर मैं तुम्हें भूखा छोड़ दूंगा तो तुम पूरे दिन मुझे अच्छे अच्छे पोज़ देती रहोगी, जो मुझे बहुत अच्छा लगता है।
मधु ने कहा- आप भैया को कंपनी दो, और हाँ, यह दरवाज़ा बाहर से बंद कर देना जिससे रोशनी अंदर न आये, अगर मैंने बंद किया तो जब आप आओगे तो मेरी नींद ख़राब होगी।
मैं तो आया ही इसी साजिश में था। मैंने मधु के जोर बूब्स दबाए और चूतड़ों पे एक चटाक लगा कर बाहर आ गया, बाहर के कमरे का भी दरवाज़ा और पर्दा लगाया और आकर सोफे पे बैठ गया।
नीलेश बोला- भाई, तूने बड़ी देर लगा दी?
मैंने आँख मारते हुए कहा- तेरी भाभी को भी तो सुलाना था, इंजेक्शन दे दिया है, अब उसे अच्छी नींद आएगी।
वो बिस्तर पे ही लगभग रेंगता हुआ मेरे पास आया और मेरे टॉवल के अंदर मेरे भीगे हुए आधे सोते हुए लण्ड को जांघों से सहलाते हुए पकड़ने पहुँचा।
जैसे ही गीलापन नीलेश के हाथों पे लगा उसने हाथ वापस खींच लिया और बोला- इसे धो तो लेता!
मैंने नीलेश को बोला- गीलेपन को टेस्ट तो कर और बता टेस्ट कैसा है?
उसको मेरी बात जंच गई, उसने मेरा टॉवल हटाया। अब मैं शादी के बाद दूसरे इंसान के सामने पूरी तरह नंगा हुया हूँ, मुझे थोड़ा सा अजीब लग रहा था क्योंकि अभी नीलेश पूरे कपड़े पहने मेरे बदन के साथ खेलने की कोशिश कर रहा था।
शादी से कई साल पहले हम एक दूसरे को इस तरह देखा करते थे, तब हम इतने छोटे भी नहीं थे, एक दूसरे का लण्ड चूसना और मुट्ठ मारने में मदद करते थे।हमारी गर्ल फ्रेंड्स भी थी पर फिर भी मुखमैथुन का जो मज़ा हम एक दूसरे को दे पाते वो हमे किसी भी लड़की से नहीं मिलता था।
वो अपने होंठ मेरे अंडकोष के पास ले गया, वो भी गीले थे।
मेरे मुंह से सिसकारी निकाल गई जब उसने अपनी जीभ से मेरे अंडकोष और आसपास के इलाके को साफ़ करना शुरू किया।
मेरी आँखें बंद थी, मैं उन पलों का मज़ा लेना चाहता था।
मेरे मुंह से अकस्मात ही निकल गया- क्यों, मधु का टेस्ट कैसा लगा?
उसने मेरा लण्ड अपने मुंह में डाला और जीभ से अंदर ही अंदर मेरे लण्ड के टोपे को सहला रहा था, मेरा सवाल सुन कर उसने लण्ड मुंह से बाहर निकाला, बोला- यार, मधु भाभी का पानी तो बहुत ही स्वादिष्ट है।और फिर से मेरे लण्ड को ऐसे चूसने लगा जैसे वो पागल हो गया हो।
मैंने उसको बोला- नीलेश, तू भी अपने कपड़े उतार ले, दोनों मजे लेते हैं।
उसने फिर से मेरे लण्ड को बाहर निकाला और लगभग डांटते हुए बोला- यार तू डिस्टर्ब मत कर, मुझे पता है तेरा पानी निकल गया तो तू मुझे नहीं चूसेगा पर डोंट वरी, लेट मी एन्जॉय द टेस्ट… और तू पूरा पानी मेरे मुंह में ही निकाल देना, बहुत सालों से तेरा पानी नहीं पिया है मैंने! And now just enjoy and dont disturb me.
मैं भी अब उसकी तगड़ी वाली चुसाई का मजा लेने लगा। उसने मेरे लण्ड को फिर बाहर निकाला, मेरी टाँगें ऊपर उठा दी और मेरे गांड के छेद में अपनी जीभ से सहलाने लगा। ऐसा मेरे साथ इससे पहले कभी नहीं हुआ था।
मुझे अजीब ज़रूर लग रहा था पर मुझे अच्छा भी लग रहा था।
अब उसने मेरी गांड के छेद को बिल्कुल चूत की तरह चाटना शुरू कर दिया। मैं बहुत ज्यादा उत्तेजित होने लगा मेरे मुंह से आवाज़ निकलने ही वाली थी कि मैंने अपना टॉवल अपने मुंह में डाल लिया जिससे आवाज़ न निकले।
वो लगातार अपने हाथों से मेरी बॉल्स को सहला रहा था और मेरी गांड चाट रहा था। मैं बहुत कोशिश कर रहा था कि मेरा पानी न निकले पर पानी तो छूटने ही वाला था, मैंने अपने हाथ से उसका सर उठाया और अपने लण्ड को उसके मुंह में डाल दिया क्योंकि मुझे उसके मुंह में ही आना था।
मैंने अपनी सारी मलाई उसके मुंह में डाल दी।
उसने मलाई पूरी निगलने के बावजूद थोड़ी और देर मेरे लण्ड को अपने मुंह में ही रखा, फ़िर मुंह की सारी मलाई मेरे टॉवल पर थूक दी और फिर से मेरे लण्ड को मुंह में लेकर चूसा और फिर बची खुची मलाई भी टॉवल पर थूक दी।
उसने कहा- अब एक एक सिगरेट हो जाये क्योंकि तू तो मुंह में लेगा नहीं, तेरा काम तो हो गया।
वो फ्रिज से एक बोतल पानी की ले आया और बालकनी में जाने लगा, मैंने तब तक दूसरा टॉवल उठाया, सिगरेट उठाई और उसके पीछे चल दिया।
उसने बाहर बालकनी में कुल्ला किया और थोड़ा पानी पी लिया। मैंने भी पानी पीया, थोड़ा साँसें नार्मल हुई।
रात के 1:30 बज चुके थे कॉलोनी की गली में काफी सन्नाटा था। मैंने सिगरेट जलाई और चुप्पी तोड़ते हुए चुटकी लेते हुए कहा- यार नीलेश, तूने तो दिलखुश कर दिया, तुझे तो प्रोफेशनली यह काम शुरू कर देना चाहिए।
वो सिर्फ मुस्कुरा रहा था, कुछ नहीं बोला और सिगरेट पीने लगा।
मैंने उसके जीन्स का बटन खोलते हुए कहा- तेरा लण्ड तो अब तक काफी गर्म हो चुका होगा।
उसकी जीन्स की चैन भी खोल दी और उसकी अंडरवियर के अंदर हाथ डालने लगा।
उसने बिना किसी रिएक्शन के ये सब होने दिया।
मैंने जब हाथ में उसका लण्ड लिया तो वो पहले से काफी बड़ा था और हम दोनों का ही साइज लगभग एक सा था। मैंने उसकी जीन्स और अंडरवियर घुटने तक उतार दी, अँधेरा और सुनसान गली का फायदा उठाते हुए मुट्ठ मारने लगा।
वो सिगरेट पीते हुए मुट्ठ मरने को शायद एन्जॉय कर रहा था।
मैंने उसके अंडकोष सहलाए और जड़ से उसके लण्ड को अच्छे से मुट्ठ मारने की कोशिश करने लगा।
वो धीरे धीरे तेज़ साँसें लेने लगा, फिर बोला- यार मैं लेट जाता हूँ, तू अच्छे से मेरी मुट्ठ मार दे। इतनी देर से खड़ा लण्ड अब और सहन नहीं होता।
हम कमरे में आ गये, मैंने सब दरवाज़े खिड़की बंद किये, दुबारा चेक किया कि मधु का कमरा बंद है और जब मैं लौटकर आया तब तक नीलेश अपने बिस्तर पे नंगा लेट चुका था और अपने हाथ से धीरे धीरे अपने लण्ड की मसाज कर रहा था।
मैं उसके बगल में जाकर बैठा और उसके लण्ड को पकड़ कर धीरे धीरे अच्छी सी मसाज देने लगा।
अब वो धीरे धीरे और तेज़ साँसें लेने लगा, वो मुझसे बोला- भाई तेरे को एक बात बोलूं बुरा तो नहीं मानेगा?
मैंने कहा- बोल यार बोल!
मेरे हाथ नहीं रुके बिल्कुल, क्योंकि मुझे याद था की उसे मुट्ठ मारते वक़्त गन्दी गन्दी बातें करके और मज़ा आता है।
नीलेश बोला- यार, मैं जब तक यहाँ हूँ, तू मुझे भाभी का पानी चखा सकता है जैसा आज चखाया था, बहुत टेस्टी पानी है।
मैंने कहा- क्यूँ नहीं, रोज़ उसकी चूत में अपना लण्ड डाल कर तुझे चुसाने आ जाऊंगा।
उसने मेरे हाथ पे अपना हाथ रखा और हिलाने को रोक दिया और बहुत गम्भीर होकर पूछा- यार मैं मज़ाक नहीं कर रहा, हवस के नशे में नहीं बोल रहा, मुझे मधु भाभी का टेस्ट बहुत ही ज्यादा अच्छा लगा।
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मैं थोड़ा सीरियस हुआ पर फिर मैंने उसका लण्ड हिलना शुरू कर दिया और कहा- तू चिंता मत कर… तेरा भाई तेरी यह इच्छा पूरी करने की पूरी कोशिश करेगा।
अब तक मेरा लण्ड भी अपनी औकात में दुबारा आना शुरू कर चुका था।
इतने में ही उसने मेरी गांड से लेकर जांघ और अंडकोष सब अपने हल्के हाथ से सहला दिए।
मैंने उसको कहा- अब 69 में आ जाते हैं, अब मेरा तेरा लौड़ा चूस सकता हूँ।
वो खुश हो गया।
हम दोनों 69 में एक दूसरे का लौड़ा और गांड का छेद दोनों चूस और चाट रहे थे।
उसने कहा- राहुल गांड को अच्छे से चाट जैसे कोई चूत हो, तुझे भी मज़ा आएगा और मुझे भी।
मैंने जैसे आदेश मिले, वैसा ही किया।
थोड़ी ही देर में हम दोनों ने बहुत सारी मलाई छोड़ दी, फिर मेरे पुराने टॉवल से उसे साफ़ कर दिया।
मैंने उसको बोला- अब तू सो जा… मैं भी सोने जा रहा हूँ।
और मैं वापस अपने कमरे में आकर अपनी नंगी बीवी से नंगा ही चिपक कर सो गया।
कहानी जारी रहेगी।

 

मैं, मेरी बीवी और फूफेरे भाई का सपना हुआ सच -1

मैं राहुल दिल्ली में अपनी बीवी मधु के साथ रहता हूँ। मेरे बारे में तो आप खुद ही अंदाज़ा लगा लेंगे।
मैं पहली बार अपनी कहानी पेश कर रहा हूँ। आप मेरे किरदार और उनकी परिस्थिति को समझ सकें, उसके लिए बीच-बीच में आस पास की चीज़ों का अंदाज़ा लगवाने की कोशिश मैं करूँगा।
यह वो शाम थी, जब मेरा बुआ का लड़का नीलेश जो मेरा हमउम्र ही है, मेरे घर आया।
वो भोपाल में रहता है।
शाम की ट्रेन से जब वो घर आया तो काफी अँधेरा हो चुका था। मैं तो बालकनी में खड़ा-खड़ा काफी देर से उसी का इंतज़ार कर रहा था। जैसे ही वो आया, मेरी ख़ुशी दुगनी हो गई।
बचपन में हम दोनों बहुत समय साथ गुज़ारते थे, अब हम दोनों को ज्यादा समय नहीं मिलता।
पहली सिगरेट, पहली बियर यह सब हमने साथ साथ ही शुरू किया था।
घर आते ही उसने मेरी बीवी के पैर छुए और मुझसे गले मिला, मैंने कहा- कमीने, मेरे भी पांव छू!
तो वो बोला- क्यों भाभी के सामने गाली खाने के काम करता है? तेरे थोड़े ही न पाँव छूऊँगा।
हंस कर हम लोग सोफे पर बैठ गए।
घर में घुसते ही पहला कमरा हमारा ड्राइंग रूम है, उसमें 56 इंच का टीवी से लैपटॉप कनेक्ट किया हुआ है, जिससे मूवी लैपटॉप पर न देखकर बड़ी स्क्रीन पर देख सके।
सोफे केवल 2 सीटर ही हैं।
एक छोटा सा कालीन एक कांच की सेंटर टेबल!
घर देखकर नीलेश बोला- भाई, तूने घर तो बड़ा सही बना रखा है।
बोलते बोलते वो अपनी सामान भी खोलता जा रहा था।
मैंने कहा- भाई, सब ऊपर वाले का करम है।
उसने बैग से एक सूट निकला जो बुआ ने भोपाल से मेरी बीवी के लिए भेजा था।
मेरी पत्नी भी वहीं बैठी थी, उसने सूट मेरी पत्नी मधु को दिया।
मधु सूट देखकर खुश हो गई।
नीलेश कुछ मिठाई वगैरह भी लाया था। मैंने नीलेश से पूछा- भाई चाय पियेगा या खाना खाकर चाय पियेगा।
वो बोला- यार, सफर में थक गया हूँ, पहले चाय पीते हैं, फिर आगे का बाद में देखेंगे।
जब तक मधु चाय बना रही थी, हमने घर परिवार सबको लेकर बात करते रहे।
जैसे ही चाय आई, मैंने मधु को बोला- हम अपनी चाय लेकर ऊपर छत पे जा रहे हैं।
हम चाय के साथ सुट्टा मरना चाहते थे इसलिए छत पे आ गये थे।
चाय पीते सुट्टा मारते हुए बातें शुरू हुई। नीलेश बोला- यार तू तो बहुत कमीना है, ये तो नहीं कि बियर वियर पिलाए… ऊपर से पूछ रहा है कि खाना खायेगा?
मैं क्या करता… हंस कर रह गया।
मैंने कहा- चल भाई बियर ले आते है।
मैंने नीचे पहुंच कर अपनी पत्नी मधु को सलाद, फल और कुछ नमकीन मेवे का इंतज़ाम करने को बोल दिया। मैं और नीलेश दोनों बियर लेने चले गए, रास्ते से एक तंदूरी मुर्गा भी पैक करा लाये।
घर आकर मैंने बियर बोतल फ्रिज में रख दी और नहाने चला गया तब तक नीलेश ने youtube पर कुछ अच्छी गज़ल्स का कलेक्शन ढूंढ के रख लिया।
यह हमारा बहुत पुराना स्टाइल है बियर या व्हिस्की पीने का।
जब तक मैं नहा कर आया पूरा इंतज़ाम हमारी सेंटर टेबल पर हो चुका था। मैं तौलिये में ही सोफे पर जाकर बैठ गया, ग़ज़ल चालू हो गई और चियर्स हुआ।
मधु सारा सामान रखकर खाने की तैयारी के लिए किचन में चली गई जो ड्राइंग रूम से ही लगी हुई है, वहाँ से दिखता कुछ नहीं है पर सुनाई सब देता है।
पहली बोतल खत्म होने के बाद नीलेश बोला- राहुल भाई, मज़ा आ गया, बहुत दिनों बाद आत्मा शांत हुई है।
और बोलते बोलते सिगरेट जलाने लगा।
मैंने उसे रोका, मैंने कहा- मैं घर के अंदर सिगरेट नहीं पीता हूँ, या तो छत पे चल या बालकनी में।
तो उसने बोतल उठाई और बालकनी में आ गया।
मैंने सिर्फ तौलिया ही पहना हुआ था पर क्योंकि बालकनी में कपड़े सूखने के लिए डाले हुए थे इसीलिए कोई ख़ास प्रॉब्लम नहीं थी।
रात के लगभग 9 बज रहे थे।
हम एक ही में से शेयर करके सिगरेट पीते थे तो आज भी हम वैसे ही पी रहे थे।
मैंने उसकी तरफ सिगरेट बढ़ाया ही था और एक हाथ में बोतल थी, तब तक मेरा तौलिया गिरने लगा।
मैंने कोहनी से जैसे तैसे सम्भाला पर जो दिखना था वो तो दिख गया।
उसने बड़े आराम से मेरे लण्ड को देखकर सिगरेट अपने हाथ में ली और बड़ा सा काश मुंह में भरा।
तब तक मैं बोतल साइड में रखकर तौलिया सही करने लगा।
नीलेश बोला- भाई, तेरा लण्ड तो पहले से काफी बड़ा हो गया है।
नीलेश और मैं शादी से पहले एक दूसरे की मुट्ठ मार दिया करते थे और मुखमैथुन भी करते थे।
मैंने कहा- तुझे सोते लण्ड में भी साइज दिख गया गांडू? साइज अच्छा लग रहा है तो अपनी गांड में ले ले।
उसने धीरे से पूछा- भाभी को तूने हम दोनों के पास्ट के बारे में बताया है?
मैंने उसको बोला- नहीं बे… तू मुझे मरवाएगा।
नीलेश मजे लेते हुए बोला- आज मेरे ही पास सो जा, रात भर अच्छी सा ओरल सेक्स करेंगे।
मैंने कहा- आईडिया बुरा नहीं है, let me try.
फिर मैंने उसे बोला- साले तेरी भी शादी हो गई, क्या हम अभी भी इसे एन्जॉय करेंगे।
नीलेश ने कहा- तो मैं कौन सा अपनी बीवी के साथ आया हूँ। अच्छा लगे तो ठीक नहीं तो भाभी के पास चले जाना।
मैंने अंदर आकर 2 और बोतल निकाली और दोनों भाई बैठकर पीते रहे।
बीच बीच में मधु का ध्यान रखते हुए हम एक दूसरे को टच भी कर रहे थे।
मैं तो तौलिये में था इसलिए वो सीधा मेरा लण्ड ही सहला देता था पर मैं उसकी जीन्स के ऊपर से ही सहला रहा था।
मैंने उसको धीरे से बोला- जल्दी से खाना खा लेते हैं जिससे मधु के काम खत्म हो जायेंगे, वो सो जाएगी और हम मस्ती मार लेंगे।
तो उसने थोड़ी बुलंद आवाज़ में मुझसे कहा- भाई खाना खाते हैं। अब और पीना होगी तो खाने के बाद थोड़ी जगह बचा लेना।
मधु ने अंदर से आवाज़ लगाकर बोला- अभी लगाती हूँ आपके लिए खाना।
हम दोनों ने फटाफट खाना खत्म किया। जब तक मधु खाना खा रही थी, हम दोनों बालकनी में सिगरेट पीने चले गए।
अब सालों बाद मिले थे, शादी के बाद बदल गए होंगे, सोच कर अभी तक कोई हरकत नहीं कर रहे थे।
पर अब तो वो मेरे तौलिये में नीचे से हाथ डाल के मेरी जांघें और टट्टे सहला रहा था। तौलिये में तम्बू बन हुआ था, मैंने उसको मना किया- भाई थोड़ा सब्र कर अभी, उसको तम्बू दिख गया तो पता नहीं क्या सोचेगी।
मैं अपने आपको कंट्रोल करके कैसे तो भी अंदर आया, थोड़ी देर बैठे रहे, फिर मधु ने पूछा- भैया कहाँ सोएँगे? इनके लिए बिस्तर लगा देती हूँ।
मैंने कहा- यहीं कालीन पर गद्दा और चादर बिछा देते हैं।
नीलेश बोला- जहाँ आप लोग ठीक समझें।
मैं जब बैडरूम में बिस्तर लेने गया तो मधु बोली- आपको बिलकुल शर्म नहीं आती? 3 घंटे से ऐसे ही टॉवल में बैठे हो, भैया क्या सोच रहे होंगे। जाओ आप पहले कपड़े पहनो और में बिस्तर लगा देती हूँ।
मैंने मधु को बोला- लड़के इतना नहीं सोचते और अब वैसे ही रात हो गई है।
थोड़ा सा रोमांटिक अंदाज़ में बोला- अब तो वैसे भी रात हो गई है, अब तो कपड़े उतारने का समय है न कि पहनने का।
और मधु के होंठों पे ज़बरदस्त सा किस कर दिया।
उसने मुझे हटाते हुए धीरे से कहा- भैया देख लेंगे, आपको तो शर्म नहीं आती।
खैर, मैंने बाहर आकर बिस्तर लगा दिया और मधु को बोला- तुम सो जाओ, हम तो इतने दिनों बाद मिले हैं, काफी बातें है करने को। इतने में नीलेश हंसते हुए बोला- भाभी, आप भी बैठो, थोड़ी गप्पें लड़ाते हैं।
मैं सोफे पर बैठा था, नीलेश नीचे बिस्तर पे और बीवी सोफे के साइड में जो हाथ रखने के लिए होता है उस पर बैठ गई।
थोड़ी बहुत देर इधर उधर की बातों के बाद मधु ने नीलेश से इजाज़त ली और कहा- आप लोग बात करिये, मैं थोड़ा थक गई हूँ, आराम कर लेती हूँ।
मैंने नीलेश को धीरे से कहा- मैं अभी आया ज़रा गुड नाईट बोल कर और आँख मार दी।
मैंने कमरे में आते ही बीवी को पीछे से बूब्स से पकड़ लिया और गले पर काटने और किस करने लगा।
बीवी ने भी मुझे प्यार से किस किया और अपनी गांड मेरे खड़े लण्ड को टॉवल के ऊपर से ही रगड़ने लगी।
मैंने पीछे से ही उसकी शॉर्ट्स में हाथ डाला और पैंटी के ऊपर से ही मधु को सहलाने लगा।
हम दोनों ही काफी गर्म हो चुके थे, मैंने धीरे से मधु से पूछा- एक क्विकी हो जाए?
उसने जबाब न देते हुए सिर्फ मेरे होंठों से होंठों को लगा दिए।
मैंने भी अपना हाथ थोड़ा गहराई में ले जाकर अब उसकी चिकनी चूत पर सहलाना शुरू कर दिया।
यह कहानी आप अन्तर्वासना डॉट कॉम पर पढ़ रहे हैं !
हम अभी तक बेड के पास ही खड़े हुए थे, बाहर से थोड़ी रोशनी अंदर आ रही थी।
हम अपनी आवाज़ पूरे कंट्रोल में करे हुए थे।
मैंने मधु को बेड पर धक्का देकर उसे उल्टा लेटा दिया और उसके शॉर्ट्स और पैंटी उतार के सीधा लण्ड उसकी चूत में डाल दिया।
वो कामाग्नि में पूरी तरह जल रही थी और मेरे लण्ड पे तो काफी देर से दुलार हो ही रहा था।
हमने थोड़ी देर ऐसे ही चुदाई का आनन्द लिया, बिना आवाज़ किये।
पर अब इच्छा और भी ज्यादा तीव्र हो चुकी थी, हम दोनों का ही क्विकी से कोई काम नहीं चलना था, मैं उसके ऊपर से उठ कर खड़ा हो गया।
उसने मेरी तरफ देखा, मैंने दरवाज़ा बंद किया और कुण्डी लगा दी और नाईट लैंप ऑन कर दिया।
मधु अब तक बिस्तर पर ही सीधी हो गई थी, मेरे सामने उसकी चूत थी और उससे काफी पानी बहता दिख रहा था। उसकी जांघें भी थोड़ी गीली होने की वजह से चमक रही थी।
मैं मधु के ऊपर लेट गया और उसके कान पर काटते हुए बोला- ऐसे काम नहीं चलेगा डार्लिंग, थोड़ा जम के चुदाई हो जाए?
मधु थोड़ा मुस्कुराई और मुझे हटाते हुए बोली- पहले उनको सुला के आ जाओ, मैं तो पूरी रात आपको ही हूँ। आप जाओ, जब आप आओगे, मैं आपको चादर में नंगी ही सोती हुई मिलूंगी, आप आकर मुझे बहुत सारा प्यार कर लेना।
मैंने कहा- मधु, घर में एक ही बाथरूम है, जो इसी रूम के आगे है और बाथरूम तो वो भी उपयोग करेगा न… इसलिए कपड़े पहन लो, हम कल सुबह मस्ती मार लेंगे। वैसे भी अगर मैं तुम्हें भूखा छोड़ दूंगा तो तुम पूरे दिन मुझे अच्छे अच्छे पोज़ देती रहोगी, जो मुझे बहुत अच्छा लगता है।
मधु ने कहा- आप भैया को कंपनी दो, और हाँ, यह दरवाज़ा बाहर से बंद कर देना जिससे रोशनी अंदर न आये, अगर मैंने बंद किया तो जब आप आओगे तो मेरी नींद ख़राब होगी।
मैं तो आया ही इसी साजिश में था। मैंने मधु के जोर बूब्स दबाए और चूतड़ों पे एक चटाक लगा कर बाहर आ गया, बाहर के कमरे का भी दरवाज़ा और पर्दा लगाया और आकर सोफे पे बैठ गया।
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